पझौता आदोलन || Pajhota Movement 1942

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 पझौता आदोलन || Pajhota Movement 1942

पझौता आदोलन || Pajhota Movement 1942
 
पझौता आदोलन || Pajhota Movement 1942

पझौता आन्दोलन की शुरूआत 1942-43 मे हई थी। इस काल में देश अकाल के दौर से गुजर रहा था तथा रिथासती सरकार ने किसानो का अन्न बाहर भेजने पर रोक लगा दी और कहा किसान अपने पास थोडा अन्न रखें बाके कोंपरेटिव सोसाइटी मे बेच दें। आलू 10 रू मन विकता था लेकिन कॉपरेटिव सोसाइटी में तोन रूपये केलो बिका तथा घराट कर, रीत विवाह कर और बेगार बढ़ा दी। इस से दुखी होकर सभी किसान को पजौता के टपरौली मे अक्तूबर 1942 को एकत्रित हुए तथा 1942 पझौता किसान समा का गठन किया। प्रधन लक्ष्मी सिंह और सचिव वैद्य सूरत सिंह बने बाद में मदन सिंह प्रधान बने। सभा ने राजा राजेन्द प्रकाश से अनुरोध किया कि स्वयम् आकर लोगों की स्थिति का जायजा लें लेकिन वजीरों ने कुछ और ही कह कर इन पर आरोप लगाए । रामस्वरूप पुलिस अधिकारी को धामला हाबन भेजा तथा समुचा पझौता में मार्शल लॉ लगा दिया। कलि राम का घर जलाया गया। वैद्य सूरत सिंह के मकान को डाइनामाइट से उडा दिया गया। कामना नाम के व्यक्ति की गोली लगने से मृत्यु हो गई । दो मास बाद पुलिस ने मुख्य 69 व्यक्तियों को पकड़ा। कुछ क्रांतिकारी भाग कर जुब्बल चले गए। भक्त चन्द ने इनका सम्मान किया। नाहन में मुकदमा चला 14 को बरी, 3 को दो-दो वर्ष कैद की सजा सुनाई और आन्दोलन दब गया था।